Thursday, 9 October 2008

कवि कभी रोया नही करता वह केवल गया करता है.....

कवि कभी रोया नही करता वह केवल गया करता है.....
दर्द सभी सीने में रखकर , वह जीवन पाया करता है.....
जब अम्बर में मेघ गरजते ,तभी कवि के भाव छलकते .....
और चादनी जब रोटी है , तभी कवि के नयन बरसते.....
आंसू संग आहों का बंधन , कवि केवल पाया करता है ...
कवि कभी रोया नही करता वह केवल गया करता है.....